Sunday, 5 August, 2012

नमक इश्क का : मोपासां की कहानी


दरख्तों से सरसब्ज पहाड़ी पर पुराने फैशन की एक हवेली थी। ऊंचे और लंबे छायादार पेड़ों की हरियाली उसे घेरे हुए थी। एक विशाल बाग था, जिसके आगे घना जंगल और फिर एक खुला मैदान था। हवेली के सामने की तरफ पत्थर का एक विशालकाय जलकुंड था, जिसमें संगमरमर में तराशी हुई परियां नहा रही थीं। ढलान पर एक के बाद एक कई कुंड थे, जिनमें से पानी की एक धारा अदृश्य फव्वारे की तरह नाचती हुई एक जलप्रपात का आभास देती थी।
इस सामंती आवास में एक नाजुक मिजाजी और नफासत को करीने से सहेजा गया था। शंख और सीपियों से सजी एक गुफा में पुराने जमाने की प्रेमकथाएं सोई हुई थीं। एक तरह से कहें तो पूरी हवेली में पुराने वक्त को सहेजकर रखा गया था। ऐसा लगता था जैसे कोई भी चीज अभी बस बोल ही पड़ेगी। बैठक की दीवारों पर पुरातन शैली की पेंटिंग्स थीं, जिनमें सम्राट लुई-15 के साथ भेड़ें चराते चरवाहे और घने घेरदार लहंगों में सुंदरियों के साथ विग पहने जांबाज आशिक चित्रित किए गए थे। एक लंबी आराम कुर्सी में एक बहुत ही बूढ़ी औरत बैठी थी। अगर वह हिलती-डुलती नहीं तो उसके मृत होने का आभास होता। उसके अनावृत पतले हाथों की चमड़ी बिल्कुल मिस्र की ममियों जैसी लगती थी।
उसकी निगाहें दूर क्षितिज में कुछ खोज रही थीं। ऐसा लगता था जैसे वह बाग में अपनी जवानी के दिन याद कर रही हो। खिड़कियों से हरियाली और फूलों में नहाकर आई हुई खुशबूदार हवा उसके झुर्रियों भरे माथे को छूकर उसे यादों के समंदर में लिए जा रही थी। उसके पास ही सुंदर परदे से ढंकी स्टूल पर एक युवती बैठी थी जिसके बाल हवा में उड़ रहे थे। वह एक कपड़े पर कढ़ाई कर रही थी। उसकी आंखों में कुछ तनाव और माथे पर चिंता की लकीरें दिख रही थीं। लग रहा था वह कढ़ाई तो कर रही है लेकिन उसका दिलो-दिमाग कहीं और खोया हुआ है। बुढिय़ा ने तुरंत ही लड़की को अपनी तरफ देखने के लिए विवश कर दिया।
'बेर्थे, अखबार में से कुछ पढ़कर सुनाओ ना। ताकि मुझे भी तो पता चला कि दुनिया में क्या हो रहा है?'
 लड़की ने अखबार उठाया और तेजी से मुआयना करते हुए कहा, 'इसमें राजनीति की एक बड़ी खबर है, इसे तो छोड़ दूं ना दादी मां?'
'हां बेटी, हां। क्या कहीं कोई प्रेम-प्रसंग की खबर नहीं है? क्या फ्रांस में आशिक मिजाजी और प्यार-मोहब्बत मर चुकी है, जो अब हमारे जमाने जैसी प्रेम-प्रसंगों की चर्चा ही बंद हो गई है?'
लड़की देर तक अखबार के पन्नों के कोने-कोने तलाश करने के बाद बोली, 'यह मिल गई एक खबर। इसका हैडिंग है 'एक प्रेम प्रसंग।'
बुढिय़ा के झुर्रियों भरे चेहरे पर मुस्कान खेलने लगी, 'हां मुझे यह खबर सुनाओ।'
यह तेजाब फेंकने की एक घटना थी, जिसमें एक स्त्री ने अपने पति की प्रेमिका से बदला लेने के लिए उस पर तेजाब फेंक दिया था। प्रेमिका की आंखें जल गई थीं। अदालत ने उस स्त्री को बाइज्जत बरी कर दिया था और लोगों ने फैसले की तारीफ की थी।
सुनकर दादी मां उत्तेजना में चिल्लाईं, 'यह तो भयानक है बेहद खौफनाक! देखो बेटी, शायद तुम्हें मेरे मतलब की कोई खबर मिले?' 
लड़की ने वापस अखबार को खंगाला तो अपराध के समाचारों में से पढ़कर सुनाने लगी।
'उदास नाटक- दुकान पर काम करने वाली एक लड़की, जो ज्यादा जवान नहीं थी। उसने एक नौजवान के प्यार में डूबकर खुद को समर्पित कर दिया लेकिन प्रेमी बेवफा निकला। लड़की ने बदला लेने के लिए अपने प्रेमी को गोलियों से भून दिया। लड़का जिंदगी भर के लिए अपाहिज हो गया। अदालत ने लड़की को बरी कर दिया और जनता ने फैसले की तारीफ की।'
खबर सुनकर दादी मां को गहरा धक्का लगा और वे कांपते हुए कहने लगीं, 'क्यों आजकल के लोग पागल हो गए हैं? तुम लोग पागल हो! ईश्वर ने जीवन के लिए सबसे बड़ा वरदान इंसान को प्रेम के रूप में दिया है। मनुष्य ने इसमें शिष्टता और रसिकता जोड़ी है। हमारे नीरस क्षणों को आल्हादित करने वाली चीज है प्रेम, जिसे तुम्हारी पीढ़ी के लोग तेजाब और बंदूकों से ऐसे खराब कर रहे हैं, जैसे उम्दा शराब में मिट्टी डाल दी जाए।'
लड़की दादी के क्रोध और झुंझलाहट को नहीं समझ पाई। कहने लगी, 'दादी मां उस औरत ने बिल्कुल सही किया। वह शादीशुदा थी और उसका पति उसे धोखा दे रहा था।'
दादी मां बोलीं, 'पता नहीं ये लोग आजकल की लड़कियों के दिमाग में कैसे-कैसे विचार ठूंस रहे हैं?' 
लड़की ने जवाब दिया, 'लेकिन दादी मां, शादी एक पवित्र बंधन है।'
दादी मां का जन्म पराक्रम और आशिक मिजाजी के दौर में हुआ था। वह अपने दौर में डूबकर दिल से कहने लगी, 'सुनो बेटा, मैंने तीन पीढिय़ां देखी हैं। शादी और प्यार में कोई समानता नहीं है। हम परिवार के लिए शादी करते हैं और शादी को खारिज नहीं कर सकते। अगर समाज एक जंजीर है तो हर परिवार उसकी एक कड़ी है। इन कडिय़ों को जोडऩे के लिए हम वैसी ही चीजें ढूंढते हैं जिनसे यह जंजीर बनी रहे। हम शादी करते हैं तो कई चीजें मिलाते हैं जाति, समाज, धन-दौलत, भविष्य, रुचियां आदि-आदि। दुनिया हमें मजबूर करती है इसलिए हम एक बार शादी करते हैं लेकिन जिंदगी में हम बीसियों बार प्रेम कर सकते हैं क्योंकि कुदरत ने हमें ऐसा ही बनाया है। तुम जानती हो बेटी, शादी एक कानून है और प्यार करना इंसान की फितरत। यह फितरत ही हमें कभी सीधे तो कभी टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर चलने के लिए मजबूर करती है। दुनिया ने कानून इसलिए बनाए हैं कि इनसे इंसान की मूल प्रवृत्तियों को काबू में किया जा सके। ऐसा करना जरूरी भी था लेकिन हमारी मूल प्रवृत्तियां ज्यादा शक्तिशाली हैं, हमें इनका विरोध नहीं करना चाहिए क्योंकि ये हमें ईश्वर ने दी हैं जबकि कानून इंसान ने बनाए हैं। अगर हम जीवन में प्यार की खुशबू नहीं भरेंगे तो जिंदगी बेकार हो जाएगी। यह ऐसा ही है जैसे बच्चे की दवा में चीनी मिलाकर देना।'
बेर्थे की आंखें आश्चर्य से खुली रह गईं। वह बड़बड़ाई, 'ओह, दादी मां, हम प्यार सिर्फ एक बार कर सकते हैं।'
दादी मां ने आसमान की ओर अपने कांपते हाथों को ऐसे उठाया जैसे कामदेव का आवाहन कर रही हों। फिर उत्तेजना में कहने लगीं, 'तुम लोग बिल्कुल गुलामों जैसे हो गए हो, बिल्कुल सामान्य। तुम लोगों ने हर काम को भारी-भरकम शब्दों में बांध दिया है और हर जगह कठिन कर्तव्यों के बंधन बांध दिए हैं। तुम लोग समता और शाश्वत लगाव में यकीन रखते हो। तुम्हें यह बताने के लिए कि कइयों ने प्यार में जान कुर्बान की है, अनेक कवियों ने कविताएं लिखी हैं। हमारे जमाने में कविता का मतलब होता था पुरुष को स्त्री से प्रेम करना सिखाना। प्रत्येक स्त्री से प्रेम करना और हम! जब हमें कोई भा जाता था तो हम उसे संदेश पहुंचाती थीं। जब नए प्रेम की उमंग हमारे मन में जागती थी तो हम पिछले प्रेमी से किनारा करने में भी देर नहीं लगाती थीं। हम दोनों से भी प्रेम कर सकती थीं।'
बुढिय़ा एक रहस्यमयी ढंग से मुस्कुराई। उसकी बूढ़ी-भूरी आंखों में एक ऐसी चमक थी और चेहरे पर ऐसे भाव थे जैसे वह किसी और ही मिट्टी की बनी हो। जैसे कोई शासक हो, सारे नियम और कायदे-कानूनों से ऊपर। लड़की का रंग पीला पड़ गया था। वह बड़बड़ाते हुए बोली, 'इसका मतलब उस जमाने में औरतें मर्यादाहीन आचरण करती थीं?'
दादी मां ने मुस्कुराना बंद किया। ऐसा लगता था जैसे उसके दिल में वाल्‍तेयर की विडंबना और रूसो की दार्शनिकता गहरे समाई हुई हो। 'इसलिए कि हम प्यार करके उसे स्वीकारने की हिम्मत रखती थीं, यहां तक कि गर्व से बताती थीं। मेरी बच्ची अगर उस जमाने में किसी स्त्री का प्रेमी नहीं होता था तो लोग उसका मजाक उड़ाते थे। तुम्हें  लगता है कि तुम्हारा पति जिंदगी भर सिर्फ तुमसे ही प्यार करता रहेगा, यह हो भी सकता है। मैं तुमसे कहती हूं कि शादी समाज के अस्तित्व के लिए बहुत जरूरी है लेकिन यह मनुष्य जाति की मूल प्रवृति नहीं है। कुछ समझीं क्या तुम? जीवन में एकमात्र खूबसूरत चीज है प्रेम और सिर्फ प्रेम। तुम इसे कैसे गलत समझ सकती हो? कैसे खराब कर और कह सकते हो? तुम इसे किसी रस्म-रिवाज या संस्कार की तरह क्यों समझते हो? जैसे कि कोई कपड़ा खरीदकर लाना हो।'
लड़की ने बुढिय़ा के कांपते हाथों को अपने हाथों में थामते हुए कहा, 'चुप करो दादी मां। मैं तुमसे प्रार्थना करती हूं अब और नहीं... बस करो।'
वह अपने घुटनों के बल झुककर, आंखों में आंसू भरकर प्रार्थना करने लगी कि ईश्वर उसे एक सघन, गहन और अमर प्रेम का आशीर्वाद दे। एक ऐसा प्रेम जो आधुनिक कवियों का स्वप्न है। जबकि दादी मां ने बड़े प्‍यार से उसका माथा चूमा। अठारहवीं शताब्दी के दार्शनिकों के उस तर्क पर विश्वास और आस्था जताते हुए, जिसने जिंदगी को अपने वक्त में इश्क के नमक से जायकेदार बना दिया था, दादी मां ने कहा, 'सावधान! मेरी प्यारी बच्ची। अगर तुम इन मूर्खतापूर्ण बातों पर विश्वास करोगी तो जिंदगी में कभी सुखी नहीं रह पाओगी।'
*कहानी का अनुवाद मेरा है।*

7 comments:

  1. बहुत अच्छी कहानी और उतना ही सधा हुआ अनुवाद भी

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  2. बहुत अच्छी कहानी है...अनुवाद काफी अच्छा किया है आपने...मोपासां,चेखव आदि की कहानियां ऐसी ही होती है जो अंतिम पंक्तियों में स्तब्ध करके रख देती हैं।

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  3. बहुत अच्छी कहानी है...अनुवाद काफी अच्छा किया है आपने...मोपासां,चेखव आदि की कहानियां ऐसी ही होती है जो अंतिम पंक्तियों में स्तब्ध करके रख देती हैं।

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